Saturday, April 22, 2017

फ्री वाई-फाई का इस्तेमाल करते हैं, तो इन बातों का रखें ध्यान वरना आपका मोबाइल या लैपटॉप हैक हो सकता है | सौरभ कुमार श्रीवास्तव

फ्री वाई-फाई का इस्तेमाल करते हैं, तो इन बातों का रखें ध्यान वरना आपका मोबाइल या लैपटॉप हैक हो सकता है | सौरभ कुमार श्रीवास्तव 


अगर आप भी सार्वजनिक जगहों पर मिलने वाले फ्री वाई-फाई नेटवर्क का इस्तेमाल करते हैं, तो आपको सावधान रहना चाहिए। सार्वजनिक वाई-फाई अनसेफ हो सकते हैं और हैकर्स आसानी से स्मार्टफोन से कई संवेदनशील जानकारियां चुरा सकते हैं। किसी भी धोखे से बचने के लिए इन बातों का ध्यान रखें...
ऐंटी-वाइरस टूल्स इस्तेमाल करें
पब्लिक वाई-फाई इस्तेमाल करने से पहले फोन में सिक्योरिटी सॉफ्टवेयर इंस्टॉल कर लें। ऐंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम में मैलवेयर आ सकते हैं। ऐसे में कोई ऐसा ऐंटीवाइरस डालें जिसमें फायरवॉल, मैलवेयर स्कैनिंग और रिमूवल जैसे फीचर्स हों। पब्लिक वाई-फाई पर कनेक्ट करने पर अन्य डिवाइसेज के मैलवेयर आपके स्मार्टफोन पर आ सकते हैं। हैकर्स इन्हें जानबूझकर भी आपके फोन में भेज सकते हैं।
बैंकिंग और शॉपिंग न करें
पब्लिक वाई-फाई के जरिये ऑनलाइन बैंकिंग या शॉपिंग नहीं करें। हैकर्स आपके अकाउंट्स की डीटेल्स हैक कर सकते हैं। अगर कोई जरूरी ट्रांजैक्शन करनी हो, तो मोबाइल डेटा इस्तेमाल करें या फिर वीपीएन इस्तेमाल करें। ब्राउजर पर नेट बैंकिंग करने के बजाय बैंक के ऑफिशल एप का इस्तेमाल करें क्योंकि वह एनक्रिप्टेड होता है।
ऑपरेटिंग सिस्टम अपडेटेड रखें
अपने फोन के ऑपरेटिंग सिस्टम को हमेशा अपडेट रखें। कंपनियां समय-समय पर सिक्योरिटी अपडेट्स जारी करती हैं, जो खामियों को दूर करते हैं और वायरस से फोन को बचाते हैं।
टू फैक्टर ऑथेंटिकेशन अपनाएं
अपने सभी ऑनलाइन अकाउंट्स जैसे जीमेल और बैंक अकाउंट्स पर टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन ऑन कर दीजिए। इससे सामान्य पासवर्ड के अलावा आपको मोबाइल फोन आने वाला ओटीपी भी डालना होता है। यह इसलिए जरूरी है क्योंकि अगर किसी ने पब्लिक वाई-फाई के जरिए आपके पासवर्ड का पता लगा लिया है, तो भी वह कुछ नहीं कर पाएगा।
स्लो वाई-फाई में रिस्क है
वाई-फाई नेटवर्क में कनेक्शन स्लो हो, तो तुरंत डिस्कनेक्ट कर दें। अगर साइन-इन पेज पर जाने में परेशानी हो रही हो, तो भी फोन को डिस्कनेक्ट करें। वाइरस की चपेट में राउटर के आने पर भी वाई-फाई की स्पीड कम हो सकती है। हो सकता है कि आप मेन राउटर के बजाय किसी अन्य राउटर से कनेक्ट हो गए हों।
हो सकता है कि आप डेटा को किसी अन्य डिवाइस के जरिए ऐक्सेस कर रहे हों। हैकर्स ट्रैक करते हैं कि आस-पास कोई वाई-फाई सिग्नल तो नहीं है। वे अपने पीसी को फेक राउटर में बदल देते हैं, जैसे ही कोई मेन राउटर के बजाय उनके डिवाइस से कनेक्ट करता है, वे उसके जरिए भेजे जाने वाले सारे डेटा को कॉपी कर लेते हैं।

About the Author

Saurabh Kumar Shrivastav

Author & Editor

Saurabh is a professional Web Designer and Developer and has aptly designed, coded, and modified visually impressive and user friendly websites. He is also a proficient Front End Developer having sound knowledge and practical expertise of HTML, CSS, and JavaScript. In addition, he is an SEO Expert and has ranked and maintained the rank of several keywords in Google.

 
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